Tuesday, June 2, 2020

Sale Target Plan & Achievement Format In Excel

Sale Target & Achievement Plan



Dear Viewer Through this video I am Explained to you how to Create Target & Achievements plan for your Marketing executive.

so guys watch the complete video and see how to work this format easily.
if you have any quarry, please mention in the comments box.

Thanks

Anoop Seth


Wednesday, May 27, 2020

श्री शिव चालीसा (Shree Shiva Chalisa)


श्री शिव चालीसा 

- : दोहा : -

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चालीसा


जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ 1
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ 2 
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ 3 
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ 4
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ 5 
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ 6
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ 7
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥ 8
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥ 9
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥ 10
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥ 11
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥ 12 
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥ 13
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥ 14
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥ 15
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥ 16
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥ 17
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥ 18
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥ 19
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥ 20
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ 21
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥ 22
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ 23
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥ 24
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥ 25
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥ 26
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥ 27
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥ 28
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥ 29
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥ 30
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥ 31
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥ 32
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥ 33
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥ 34
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥ 35
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥ 36
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ 37
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥ 38
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥ 39
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥ 40

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

--: दोहा :--

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

अवसर (Chance)


अवसर 

एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।
ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?
दुकानदार ने कहा – अवसर का ।
ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?
दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।
ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?
दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है ।
ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे पीछे से गंजा सिर किसका है?
दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है । यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा । वह ग्राहक इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ चुका था ।
दोस्तो,
आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है । Real मे भगवान ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म दिया है । अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते रहते है पर हम उसे पहचान नही पाते या पहचानने मे देर कर देते है । और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते है क्योकि हम बड़े अवसर के ताक मे रहते हैं । पर अवसर बड़ा या छोटा नही होता है । हमे
हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये ।

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते (Spoken words do not return)

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.
संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.
तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”
किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.

Introduction, Microphone, Speech, Ceo, Woman, Audio

गायत्री मंत्र - अर्थ सहित ( Gayatri Mantra )


गायत्री मंत्र - अर्थ सहित 

ब्रह्मनाद 

ॐ SSSSS
ॐ SSSSS
ॐ SSSSS


गायत्री मंत्र मीनिंग इन हिंदी
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उस प्राण स्वरूप दुःखनाशक, सुख स्वरूप, 
श्रेष्ठ तेजस्वी, पापनाशक, देव स्वरूप, 
परमात्मा को हम अंतरात्मा में धारण करें। 
वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें । 
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तूने हमें उत्पन्न किया पालन कर रहा है तू । 
तुझसे ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता है तू । 
तेरा महान तेज है, छाया हुआ सभी स्थान । 
सृष्टि की वस्तु-वस्तु में, तू हो रहा है विद्यमान । 
तेरा ही धरते ध्यान हम, माँगते तेरी दया । 
ईश्वर हमारी बुद्धि को, श्रेष्ठ मार्ग पर चला ।